Solution sem 3 M1
### 1. निम्नलिखित में से किन्हीं दो वर्णनात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (8×2=16)
**a) मुद्रा की परिभाषाएँ एवं कार्यों की व्याख्या कीजिए। कैम्ब्रिज नकद शेष दृष्टिकोण (Cash Balance Approach) की विस्तार से चर्चा कीजिए।**
**मुद्रा की परिभाषाएँ:**
- संकुचित अर्थ में: नोट एवं सिक्के।
- व्यापक अर्थ में: मुद्रा + मांग जमा (डिमांड डिपॉजिट)।
- क्रोथर: "जो कुछ भी सामान्यतः भुगतान के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाता है, वह मुद्रा है।"
- सेलिगमैन: "एक ओर ऋण चुकाने की शक्ति तथा दूसरी ओर वस्तुओं एवं सेवाओं को क्रय करने की शक्ति।"
**मुद्रा के कार्य:**
- **प्राथमिक कार्य:**
1. विनिमय का माध्यम (सुलभ लेन-देन)।
2. मूल्य मापन की इकाई (कीमत निर्धारण)।
- **द्वितीयक कार्य:**
1. मूल्य संग्रह (बचत का रूप)।
2. भुगतान स्थगन (भविष्य में भुगतान)।
3. ऋण हस्तांतरण।
- **आकस्मिक कार्य:** आय एवं संपत्ति वितरण, उत्पादन कारकों का मूल्य निर्धारण, साख का आधार।
**कैम्ब्रिज नकद शेष दृष्टिकोण (Cambridge Cash Balance Approach):**
- पिगू, मार्शल, रॉबर्टसन एवं कीन्स द्वारा विकसित।
- समीकरण: **M = kPY**
जहां M = मुद्रा की मात्रा, P = मूल्य स्तर, Y = वास्तविक आय, k = आय का वह भाग जो लोग नकद या बैंक में रखना चाहते हैं।
- यह मांग पक्ष पर जोर देता है। लोग अपनी आय का कुछ भाग (k) नकद शेष के रूप में रखते हैं।
- k निर्धारकों: भुगतान की आदतें, बचत प्रवृत्ति, ब्याज दर, अपेक्षाएँ।
- फिशर से अंतर: यह आय (Y) पर फोकस करता है, न कि लेन-देन (T) पर। k परिवर्तनशील है, इसलिए अल्पकालिक विश्लेषण भी संभव।
- महत्व: मुद्रा की मांग को व्यवहारिक बनाया, कीन्स की तरलता प्राथमिकता का आधार।
**b) कीन्स की तरलता प्राथमिकता ब्याज सिद्धांत (Liquidity Preference Theory of Interest) समझाइए तथा निवेश फलन एवं पूंजी की सीमांत दक्षता (MEC) पर इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए।**
**तरलता प्राथमिकता सिद्धांत:**
- कीन्स के अनुसार ब्याज दर मुद्रा की मांग (तरलता प्राथमिकता) एवं आपूर्ति से निर्धारित होती है।
- मुद्रा मांग के तीन उद्देश्य:
1. **लेन-देन मांग:** दैनिक व्यय के लिए (आय के साथ बढ़ती है)।
2. **सावधानी मांग:** अप्रत्याशित व्यय के लिए।
3. **सट्टा मांग:** बांड कीमतों की अपेक्षा से (ब्याज दर से उल्टी संबंध)।
- कुल मांग: L = L1 (Y) + L2 (r)।
- मुद्रा आपूर्ति निश्चित होने पर ब्याज दर संतुलन स्तर पर निर्धारित होती है।
- शास्त्रीय से अंतर: ब्याज मौद्रिक घटक है, न कि केवल बचत-निवेश।
**निवेश फलन एवं MEC पर प्रभाव:**
- **MEC (Marginal Efficiency of Capital):** नई पूंजीगत संपत्ति से अपेक्षित लाभ की दर।
- निवेश स्तर वहाँ होता है जहाँ MEC = ब्याज दर (r)।
- यदि तरलता प्राथमिकता बढ़े → ब्याज दर बढ़े → MEC घटे → निवेश कम → आय एवं रोजगार कम।
- मंदी में सट्टा मांग अनंत → ब्याज दर कम नहीं होती → निवेश नहीं बढ़ता (तरलता जाल)।
**c) वाणिज्यिक बैंक का अर्थ, विकास एवं कार्य समझाइए। बैंकिंग लाभप्रदता को प्रभावित करने वाले कारकों पर प्रकाश डालिए।**
**अर्थ:** वाणिज्यिक बैंक लाभ के उद्देश्य से जमा स्वीकार करने एवं ऋण देने वाले वित्तीय संस्थान हैं।
**विकास:**
- इटली से शुरू (14वीं शताब्दी), इंग्लैंड में गोल्डस्मिथ से।
- भारत में: बैंक ऑफ हिंदुस्तान (1770), फिर इंपीरियल बैंक → SBI।
**कार्य:**
- प्राथमिक: जमा स्वीकार, ऋण देना, साख सृजन।
- द्वितीयक: एजेंसी (बिल भुगतान, ट्रांसफर), सामान्य (लॉकर, विदेशी मुद्रा)।
**लाभप्रदता को प्रभावित करने वाले कारक:**
- ब्याज स्प्रेड (ऋण ब्याज - जमा ब्याज)।
- गैर-ब्याज आय (फीस, कमीशन)।
- परिचालन लागत (वेतन, शाखाएँ)।
- NPA स्तर (खराब ऋण)।
- आर्थिक स्थिति, प्रतिस्पर्धा, नियामक नीतियाँ (CRR, SLR)।
- डिजिटलीकरण से लागत कम।
**d) ई-बैंकिंग की अवधारणा, आवश्यकता एवं क्षेत्र की व्याख्या कीजिए। इसके प्रमुख उत्पादों (क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, स्मार्ट कार्ड, मोबाइल बैंकिंग) पर चर्चा कीजिए।**
**अवधारणा:** इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों (इंटरनेट, मोबाइल, ATM) से बैंकिंग सेवाएँ।
**आवश्यकता:** तेज गति, कम लागत, 24×7 उपलब्धता, वैश्वीकरण।
**क्षेत्र:** फंड ट्रांसफर, बिल भुगतान, खाता प्रबंधन, निवेश।
**प्रमुख उत्पाद:**
- **क्रेडिट कार्ड:** उधार पर खरीद, क्रेडिट लिमिट, ब्याज यदि समय पर नहीं चुकाया।
- **डेबिट कार्ड:** सीधे खाते से भुगतान, PIN आधारित।
- **स्मार्ट कार्ड:** चिप आधारित, अधिक सुरक्षित, ऑफलाइन उपयोग संभव।
- **मोबाइल बैंकिंग:** ऐप से ट्रांसफर, बैलेंस चेक, UPI एकीकरण।
### 2. निम्नलिखित में से किन्हीं दो वर्णनात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (8×2=16)
**a) मुद्रास्फीति एवं अपस्फीति के अर्थ, प्रकार एवं कारणों की चर्चा कीजिए। मुद्रास्फीति नियंत्रण के उपाय बताइए।**
**मुद्रास्फीति:** सामान्य मूल्य स्तर में सतत वृद्धि।
**अपस्फीति:** सामान्य मूल्य स्तर में सतत कमी।
**प्रकार:**
- मुद्रास्फीति: मांग-जनित, लागत-जनित, संरचनात्मक, गैलोपिंग।
- अपस्फीति: मंदीजनित, साख संकुचन से।
**कारण:**
- मुद्रास्फीति: अधिक मुद्रा आपूर्ति, मांग वृद्धि, लागत वृद्धि (वेतन, कच्चा माल)।
- अपस्फीति: मांग कमी, मुद्रा संकुचन, उत्पादन अधिकता।
**नियंत्रण उपाय (मुद्रास्फीति):**
- मौद्रिक: CRR बढ़ाना, OMO से मुद्रा बेचना।
- राजकोषीय: कर बढ़ाना, व्यय कम।
- अन्य: मूल्य नियंत्रण, उत्पादन बढ़ाना।
**b) कीन्सियन व्यवसाय चक्र सिद्धांत (Theory of Business Cycle) की व्याख्या कीजिए। बेरोजगारी के प्रकार एवं कारणों पर प्रकाश डालिए।**
**व्यवसाय चक्र सिद्धांत:** आर्थिक उतार-चढ़ाव गुणक एवं त्वरक (accelerator) के संयोजन से।
- उतार: निवेश बढ़ → गुणक से आय बढ़ → त्वरक से निवेश और बढ़ → बूम।
- अवनति: MEC घट → निवेश कम → गुणक से आय कम → चक्र।
**बेरोजगारी के प्रकार एवं कारण:**
- **अनैच्छिक:** प्रभावी मांग की कमी (मुख्य कीन्सियन)।
- **घर्षणी:** नौकरी बदलते समय।
- **संरचनात्मक:** कौशल मिसमैच।
- **चक्रीय:** मंदी से।
- **स्वैच्छिक:** मजदूरी से असंतुष्ट।
**c) केंद्रीय बैंक की परिभाषा, विशेषताएँ एवं महत्व समझाइए। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के उद्देश्यों एवं साधनों की चर्चा कीजिए।**
**परिभाषा:** देश का शीर्ष बैंक, मुद्रा जारीकर्ता।
**विशेषताएँ:** लाभ रहित, सरकार नियंत्रित, एकाधिकार।
**महत्व:** मौद्रिक स्थिरता, साख नियंत्रण, विकास।
**RBI मौद्रिक नीति:**
- **उद्देश्य:** मूल्य स्थिरता, वृद्धि, रोजगार, विनिमय स्थिरता।
- **साधन:**
- मात्रात्मक: रेपो दर, CRR, SLR, OMO।
- गुणात्मक: नैतिक अनुनय, मार्जिन नियंत्रण।
**d) खुदरा बैंकिंग की विशेषताएँ, क्षेत्र, लाभ एवं हानियाँ समझाइए। भारत में खुदरा बैंकिंग की वृद्धि के कारण एवं चुनौतियाँ बताइए।**
**विशेषताएँ:** व्यक्तिगत ग्राहक, कम राशि, विविध उत्पाद।
**क्षेत्र:** आवास ऋण, वाहन ऋण, व्यक्तिगत ऋण, जमा।
**लाभ:** स्थिर जमा, क्रॉस-सेलिंग, कम जोखिम।
**हानियाँ:** उच्च परिचालन लागत, NPA जोखिम।
**वृद्धि के कारण:** डिजिटलीकरण (UPI), मध्यम वर्ग वृद्धि, वित्तीय समावेशन।
**चुनौतियाँ:** साइबर सुरक्षा, प्रतिस्पर्धा (फिनटेक), NPA।
### 3. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए: (8×2=16)
**a) फिशर एवं कैम्ब्रिज मुद्रा मात्रा सिद्धांतों में समानताएँ एवं अंतर स्पष्ट कीजिए।**
**समानताएँ:** दोनों मात्रावादी, मूल्य स्तर मुद्रा आपूर्ति पर निर्भर।
**अंतर:** फिशर (MV=PT) लेन-देन पर, कैम्ब्रिज (M=kPY) नकद शेष पर; फिशर V,T स्थिर, कैम्ब्रिज k परिवर्तनशील।
**b) कीन्स के अनुसार उपभोग फलन के निर्धारक एवं गुणक (Multiplier) की अवधारणा समझाइए।**
**निर्धारक:** आय (मुख्य), संपत्ति, ब्याज, अपेक्षाएँ।
**गुणक:** K = 1/(1-MPC)। निवेश वृद्धि से आय कई गुना बढ़ती है।
**c) वाणिज्यिक बैंकों द्वारा साख सृजन की प्रक्रिया एवं उसकी सीमाएँ बताइए।**
**प्रक्रिया:** जमा → आरक्षी रख → शेष ऋण → नई जमा → चक्र। कुल साख = प्रारंभिक जमा / CRR।
**सीमाएँ:** नकद रिसाव, ऋण मांग कमी, RBI नियंत्रण।
**d) डिजिटल मुद्रा एवं भुगतान प्रणाली (ECS, NEFT, RTGS, UPI) की व्याख्या कीजिए।**
**डिजिटल मुद्रा:** इलेक्ट्रॉनिक रूप (कार्ड, वॉलेट)।
**प्रणाली:** ECS (आवर्ती भुगतान), NEFT (बैच, कोई न्यूनतम नहीं), RTGS (रीयल टाइम, ₹2 लाख+), UPI (तत्काल, मोबाइल आधारित)।
### 4. निम्नलिखित प्रश्नों के लघु उत्तर दीजिए: (4×4=16)
**a) मुद्रा के प्रमुख कार्य बताइए।**
विनिमय माध्यम, मूल्य मापन, मूल्य संग्रह, भुगतान स्थगन।
**b) कीन्सियन अर्थशास्त्र में पूर्ण रोजगार की अवधारणा समझाइए।**
वह स्थिति जहाँ केवल स्वैच्छिक एवं घर्षणी बेरोजगारी हो, अनैच्छिक न हो। प्रभावी मांग से निर्धारित।
**c) वाणिज्यिक बैंकिंग के सुधारपूर्ण सिद्धांत क्या हैं?**
तरलता, सुरक्षा, लाभप्रदता, विविधीकरण, गोपनीयता।
**d) इंटरनेट बैंकिंग एवं वर्चुअल बैंकिंग में अंतर स्पष्ट कीजिए।**
इंटरनेट बैंकिंग: पारंपरिक बैंक की ऑनलाइन सेवा। वर्चुअल: केवल ऑनलाइन बैंक, कोई भौतिक शाखा नहीं।
**e) मुद्रास्फीति के प्रभावों की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।**
आय पुनर्वितरण (ऋणी लाभ), उत्पादन प्रभाव, बचत हानि, आर्थिक अस्थिरता।
**f) अपस्फीति नियंत्रण के उपाय बताइए।**
सार्वजनिक व्यय बढ़ाना, ब्याज दर कम, मुद्रा आपूर्ति बढ़ाना।
**g) कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस की विशेषताएँ एवं महत्व समझाइए।**
सभी शाखाएँ केंद्रीय सर्वर से जुड़ीं, रीयल टाइम। महत्व: दक्षता, ग्राहक सुविधा।
**h) खुदरा एवं थोक बैंकिंग में अंतर बताइए।**
खुदरा: व्यक्तिगत/छोटे, कम राशि। थोक: बड़े कॉर्पोरेट, उच्च राशि।
### 5. दिए गए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए: (2×8=16)
**a)** (ii) M = kPY
**b)** (i) आय का पुनर्वितरण
**c)** (iii) दोनों पर
**d)** (ii) घर्षणी एवं संरचनात्मक
**e)** (i) परिचालन दक्षता में वृद्धि
**f)** (iii) मार्जिन आवश्यकता
**g)** (ii) व्यक्तिगत एवं छोटे व्यवसाय
**h)** (i) Paytm
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