हॉलमार्क
हालमार्क (अंग्रेजी: hallmark), प्लेटिनम, स्वर्ण, रजत आदि बहुमूल्य धातुओं पर लगाया जाने वाला आधिकारिक चिह्न या मुहर है जो उसकी गुणवत्ता प्रमाणित करने के लिये लगायी जाती है।
सोने की शुद्धता और सुंदरता को प्रमाणित करने की प्रक्रिया को हॉलमार्किंग (Hallmarking) कहा जाता है। भारतीय मानक ब्यूरो (The Bureau of Indian Standards (BIS)), भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है, BIS अधिनियम के तहत सोने के साथ ही साथ चांदी के आभूषणो की भी हॉलमार्किंग आवश्यक है। अगर आप सोने के आभूषण/सोने के सिक्के पर BIS हॉलमार्क देखते हैं, तो इसका मतलब है कि यह BIS द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप है। हॉलमार्किंग उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे गए सोने की शुद्धता के बारे में आश्वासन देती है। यानी, अगर आप हॉलमार्क वाले 18K सोने के आभूषण खरीद रहे हैं, तो इसका मतलब यह होगा कि 18/24 भाग सोना है और बाकी मिश्र धातु है।
हालांकि पहले हॉलमार्किंग वैकल्पिक था, लेकिन 15 जनवरी, 2021 के बाद से, सोने के आभूषण बेचने के लिए देश भर में हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई है। इससे सोने की खरीदारी सुरक्षित होगी और ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा। लेकिन इसके साथ ही साथ इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए ग्राहकों की जागरूकता भी ज़रूरी है। यह जांचने के लिए कि आपके द्वारा खरीदा गया सोना हॉलमार्क गोल्ड (Hallmark Gold) है या नहीं।
भारत में आमतौर पर २२ कैरट सोने के आभूषण स्तेमाल होते हैं। 22 कैरट सोने के आभूषण पर 916 अंक अंकित होता है। इसमें 91,6 प्रतिशत सोना होता है। इसी प्रकार सोने आभूषण पर अन्य अंकों का अर्थ लगाया जा सकता है।
375 का अर्थ 37.5 % शुद्ध सोना
585 का अर्थ 58.5 % शुद्ध सोना
750 का अर्थ 75.0 % शुद्ध सोना
916 का अर्थ 91.6 % शुद्ध सोना
990 का अर्थ 99.0 % शुद्ध सोना
999 का अर्थ 99.9 % शुद्ध सोना
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