कर विवर्तन shifting of tax
कर विवर्तन (Shifting of taxation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति स्वयं पर लगाए गए कर भार को अन्य व्यक्तियों पर डाल देता है। कर का विवर्तन करना कानूनन अपराध नहीं है। कई लोग आय कम दर्शाकर, कर चुकाने से बच जाते हैं। इसे कर का अपवंचन कहते हैं।
कर विवर्तन उस क्रिया को कहा जाता है जिसके द्वारा कर का आंशिक या कुल भार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति पर टाला जाता है। कर विवर्तन दो प्रकार का हो सकता है:
1. आगे की ओर विवर्तन (Forward Shifting): कर का विक्रेता से क्रेता पर विवर्तन होना आगे की ओर विवर्तन कहलाता है। इस विवर्तन में वस्तु के मूल्य में वृद्धि कर दी जाती है। 2. पीछे की ओर विवर्तन (Backward Shifting): कर का क्रेता से विक्रेता की ओर विवर्तन होना पीछे की ओर कर विवर्तन कहलाता है। कर का भार क्रेता से विक्रेता की ओर विवर्तित होता है।
कर विवर्तन के प्रकार
कर विवर्तन के प्रकारों के बारे में तकनीकी रूप से निम्न प्रकार है :-
अग्रग्रामी कर-विवर्तन
पश्चगामी कर-विवर्तन
अग्रोन्मुखी कर-विवर्तन
1. अग्रगामी कर-विवर्तन - अग्रगामी कर-विवर्तन से हमारा तात्पर्य सामान्य रूप से उस प्रक्रिया से है जिसके अन्तर्गत कर देने वाला व्यक्ति या संस्था कर का भार आगे वाले सम्बन्धित व्यक्ति पर टालने में सफल हो जाता है। उदाहरण के लिए आप बिक्री कर को लीजिए - माना सरकार द्वारा बिक्री कर लगा दिया गया तब उस कर को अदा तो वस्तु का विक्रेता करेगा लेकिन कर की धनराशि को वह अपनी जेब से नहीं करेगा। इस धनराशि के बराबर वह वस्तु की कीमत बढ़ा देगा तथा उसे क्रेता से बसूल लेगा जिसे सामान्य रूप से उस वस्तु का उपभोक्ता ही कहा जायेगा। इस प्रकार इस प्रकार के कर विवर्तन में विक्रेता करके भार को वस्तु की कीमत बढ़ाकर वस्तु के उपभोक्ता पर टाल दिया जाता है तथा इस करभार को उपभोक्ता आगे और नहीं टाल सकता। इस प्रकार अग्रगामी कर विवर्तन में कराघात विक्रेता पर तथा करापात वस्तु के उपभोक्ता पर पड़ता है।
2. पश्चगामी कर विवर्तन - पश्चगामी कर विवर्तन ठीक अग्रगामी कर विवर्तन की उल्टी प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत करदाता के भार को उस वस्तु या सेवा से सम्बन्धित पूर्ववर्ती व्यक्ति या इकाई पर टाला जाता है तथा कर का भार पूववर्ती व्यक्ति या इकाई द्वारा ही सहन करना पड़ता है। इस प्रकार जब कर भार को पीरछे की ओर टाला जाता है तब उसे पश्चगामी कर विवर्तन की संज्ञा दी जाती है। इस एक उदाहरण द्वारा आसानी से समझाया जा सकता है। सरकार द्वारा उत्पादन कर लगाने की स्थिति में कर के भार को दो रूपों में टाला जा सकता है। प्रथमत: वह उत्पादन कर को उत्पादन की कीमत बढ़ाकर क्रेता से वसूल ले तथा द्वितीयत: वह उस उत्पादन में प्रयुक्त कच्चे माल की कीमतों में कर की धनराशि के बराबर कमी कर दे ताकि कर का भार कच्चे माल की आपूर्ति कर्ता को वहन करना पड़े। इस प्रकार पश्चगामी कर विवर्तन द्वितीय स्थिति की ओर इंगित करता है। इस प्रकार के कर विवर्तन में करापात को पीछे की प्रिक्रा में शामिल करते हुए टाल दिया जाता है तथा उसी से परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से बसूल लिया जाता है।
3. अग्रोन्मुखी कर विवर्तन - यह कर विवर्तन की वह अवस्था है जिसके अन्तर्गत करापात को आगे की ओर विक्रेता तथा उपभोक्ता के पूर्व के मध्यस्थों पर टाला जाता है। इस प्रक्रिया में कर भार को एक से अधिक क्रेताओं तथा छोटे विक्रेताओं पर टाला जाता है। इस प्रकार यह कर विवर्तन उपभोक्ता से पूर्व तक का अग्रगामी कर विवर्तन है।
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