निर्देशांक

मुद्रा के मूल्य का माप (निर्देशांक)
[MEASUREMENT OF THE VALUE OF MONEY]

विभिन्न वस्तुओं तथा सेवाओं का मूल्य मुद्रा के रूप में मापा जाता है। परन्तु मुद्रा का मूल्य के रूप में नहीं मापा जा सकता। यदि मुद्रा का मूल्य वस्तुओं तथा सेवाओं के रूप में व्यक्त किया जाता है मुद्रा के लाखों मूल्य हो जायेंगे, क्योंकि संसार में लाखों वस्तुएँ तथा सेवाएँ हैं। इस कठिनाई को दूर करने के लिए हम मुद्रा का 'सामूहिक मूल्य' निकाल लेते हैं। इसके लिए हम कुछ ऐसी प्रतिनिधि वस्तुओं तथा सेवाओं को चुनते हैं जिन्हें हम दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं। इनका 'सामान्य मूल्य' निकाल देते हैं, जिसे सामान्य मूल्य-स्तर' (General Price Level) कहा जाता है। सामान्य मूल्य-स्तर का अनुमान कीमत निर्देशक (Index Number) की सहायता से लगाया जाता है।

निर्देशांक का अर्थ एवं परिभाषाएँ
MEANING AND DEFINITIONS OF INDEX NUMBER)

"निर्देशांक एक सारणीबद्ध विवरण होता है, जिसमें कई वस्तुएँ दी हुई होती हैं और दो विभिन्न अवधियो में इसकी कीमतें दी हुई होती हैं जिससे कि सामान्य कीमत-स्तर के परिवर्तनों का पता लग सकता है। इस तरह निर्देशांक से यह मालूम होता है कि कीमत-स्तर कितना बढ़ गया है अथवा कितना कम हो गया है।

निर्देशांक की कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं:
(1) प्रो. लैस्टर वी. चाण्डलर - "कीमत निर्देशांक वे संख्याएँ हैं जो किसी समय विशेष की औसत कीमतों की ऊँचाइयों की तुलना किसी अन्य समय की कीमतों की ऊँचाई से करती हैं, इस समय को आधार वर्ष माना जाता है।"
(2) सेक्रिस्ट- "निर्देशांक अंकों की एक श्रृंखला है जिसके द्वारा समय-समय अथवा स्थान स्थान के परिवर्तनों को मापा जाता है। "

निर्देशांक की विशेषताएँ
( CHARACTERISTICS OF INDEX NUMBER)

निर्देशांक की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :
(1) परिवर्तनों का सापेक्ष माप-निर्देशांक की सहायता से मुद्रा के मूल्य या कीमतों के सापेक्ष परिवर्तनों को मापा जा सकता है।
(2) निर्देशांक प्रतिशतों का माध्य है-निर्देशांक किसी तथ्य में होने वाले परिवर्तनों के प्रतिशत को माध्य के रूप में प्रस्तुत करता है। आधार-वर्ष तथा चालू-वर्ष के सन्दर्भ में जो मूल्यानुपात (Price Lives) निकाले जाते हैं, निर्देशांक उनका माध्य था औसत होता है।
(3) निर्देशांक तुलना का आधार प्रस्तुत करता है-निर्देशांक के द्वारा के आधार पर कीमतों में होने वाले परिवर्तन का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। किसी प्रचलित समय में उसको तुलना की जाती है। 
(4) बढ़ते या घटते हुए निर्देशांक : निर्देशांक मुद्रा के मूल्य के निरपेक्ष (absolute) मापक नहीं है वरन् कीमतों के परिवर्तन के तुलनात्मक रूप को ही दिखाते हैं। निर्देशक के द्वारा दो समयों के बीच सामान्य मूल्य-स्तर में कितना परिवर्तन हुआ यही जाना जा सकता है। यदि यह कहा जाय कि निर्देशांक 200 है तो इसका कोई निश्चित अर्थ नहीं निकलता, परन्तु यदि यह करें कि सन् 1990 में मूल्य 100 था और सन् 2000 ई. में 200 था। तो यह समझ आता है कि 1990 को तुलना में 2000 में वस्तुओं के मूल्य दुगुने हो गये हैं अर्थात् मुद्रा का मूल्य आधा हो गया। अतः निर्देशांकों का तुलनात्मक महत्व है।

निर्देशांक के भेद
(KINDS OF INDEX NUMBERS)

(1) साधारण निर्देशांक (Simple Index Number)- मूल्य तैयार करते समय वस्तुओं के सापेक्षिक महत्व को ध्यान में नहीं रखते हैं।
(2) भारशील निर्देशांक (Weighted Index Number)- ये मूल्य करते समय वस्तुओं के सापेक्षिक महत्व को ध्यान में रखते हैं।

साधारण निर्देशांक बनाने की विधि-साधारण निर्देशांक बनाने के लिए हमे किस वर्ष की तुलना करनी है, यह निश्चित करना होगा। इसी वर्ष को आधारवर्ष कहते हैं। आधार की विभिन वस्तुओं के मूल्य को 100 के बराबर मान लिया जाता है, फिर उनको जोड़कर वस्तुओं की संख्या में भाग दिया जाता है। जो भागफल आयेगा वह आधार-वर्ष का निर्देशांक होगा। इसी प्रकार जिस वर्ष के मूल्यों की तुलना करनी हो उसको भी आधारवर्ष के मूल्यों की तुलना में 100 में परिणित करके (चल वर्ष का मूल्य/आधार वर्ष का मूल्य × 100) उनके योग को वस्तुओं की संख्या से भाग दे देना चाहिए। इससे जो  भागफल आएगा वह उस वर्ष का निर्देशांक होगा। अब दोनों निर्देशांकों की तुलना करेंगे। यदि चल वर्ष का सामान्य मूल्य का निर्देशांक 100 के ऊपर है तो इससे यह आशय निकलता है कि जो चीजे पहले 100 में मिलती थी उनके लिए अब 100 रुपये अधिक देना पड़ता है और मुद्रा का मूल्य गिर गया है। और जब यह निर्देशांक 100 से कम हो जाय तो इससे यह आशय निकलता है कि चीने पहले 100 रुपये में मिली थी के लिए अब 100 से कम कीमत देना पड़ता है और मुद्रा का मूल्य बढ़ गया है।

भारशील निर्देशांक बनाने की विधि (Method of Constructing Weighted lamps Number) इसको बनाने की विधि भी साधारण निर्देशांक की तरह है। अन्दर केवल इतना हो है कि इसमें  प्रत्येक वस्तु को उसके महत्व के अनुसार कुछ भार दे दिया जाता है, क्योंकि जिस कार्य के लिए निर्देशांक तैयार किया जाता है, वस्तुओं का महत्व एक-सा नहीं होता। वरन् कुछ वस्तुओं का महत्व अधिक होता है और कुछ वस्तुओं का कम। मान लीजिये उपर्युक्त उदाहरण में गेहूँ महत्व को देखते हुए प्रदान किया आय हो भारशील निर्देशांक निम्न प्रकार बनेगा:
उपर्युक्त भारशील निर्देशांकों से यह स्पष्ट होता है कि 1977 की अपेक्षा 1997 के सामान्य त्व-कर में 81% की वृद्धि हुई है। दूसरे शब्दों में, मुद्रा का मूल्य 81% कम हो गया है।

निर्देशांक बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें (Points to be kept in Mind while Constructing findes Number)

(1) आधारवर्ष का चुनाव (Selection of the Base Year) - सबसे पहले आधार कार बहुत सावधानी से करना चाहिए जिसकी दो रीतियाँ प्रचलित है:

(अ) स्थिर आधार इसी रीति के अन्तर्गत एक निश्चित वर्ष को आधार मान लिया जाता है अन्दू यह वर्ष एक सामान्य वर्ष होना चाहिए जिसमें किसी प्रकार की असाधारण पटना, जैसे- अकाल, भूकम्प
आदि न घटी हो।
(ब) श्रृंखला आधार-इस रीति में दिये हुए वर्ष के निर्देशांक पिछले वर्ष को आधार जाते है अर्थात् 1998 वा आधारवर्ष 1997 होगा, 1997 का आधारवर्ष 196 होगा 1986 का आधा 1995 होगा आदि।

(2) वस्तुओं का चुनाव चूंकि निर्देशांक वस्तुओं को सहायता से बनाये जाते हैं इसलिए आधार वर्ष चुनने के बाद वस्तुओं को चुनने की समस्या आती है। सभी वस्तुओ को निर्देशांक में सम्मिलित करना व्यावहारिक दृष्टिकोण से सम्भव नहीं रहता है, अतः वस्तुओं का चुनाव करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

(क) वे समाज की रुचि, रीति-रिवाज और आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करती हो ।
(ख) बस्तुएँ प्रमाणित (Standard) होनी चाहिए।
(ग) किसी वस्तु को उसी किस्म को सम्मिलित करना चाहिये जिसका साधारणत लोग प्रयोग करते है।
(घ) बस्तुओं की संख्या आवश्यक रूप में अधिक नहीं होनी चाहिए।

(3) वस्तुओं का मूल्य वस्तुओं का मूल्य थोक हो या फुटकर यह बात निर्देशांक बनाने के उद्देश्य पर निर्भर है। मुद्रा का सामान्य मूल्य जानने के लिए थोक मूल्य लेना चाहिए क्योंकि एक तो उन्हें मालूम करना आसान होता है और दूसरा उसमें समानता अधिक होती है।

(4) मूल्य अनुपात निकालना मूल्य अनुपात की गणना करने में आधार वर्ष के मूल्य को 100 मान लिया जाता है और फिर जिस वर्ष की कीमतों का निर्देशांक बनाना होता है उसकी कीमतों को आधार वर्ष की कीमतों के प्रतिशत में निकालते हैं, जो इस प्रकार निकाला जाता है: चल वर्ष का मूल्य/ आधार वर्ष का मूल्य×100

(5) औसत निकालना-अन्त में आधार-वर्ष और दूसरे वर्ष के मूल्यों के प्रतिशत का औसत निकाला जाता है। इसके लिए कई माध्य प्रचलित हैं- (1) अंकगणित माध्य (Arithmetic Average) | (2) गुणोत्तर माध्य (Geometric Average) । (3) मध्यक (Median) । (4) हरात्मक माध्य (Harmonic Mean) अधिकतर अंकगणित माध्य ही विशेष लोकप्रिय है, क्योंकि यह बहुत सरल है। आधार वर्ष का औसत 100 होगा। दूसरा औसत जैसे-जैसे सामान्य कीमत-स्तर बढ़ता या घटता है, उसी के अनुम अनुसार 100 से अधिक या कम होगा। सारणी एक में दिये गये निर्देशांक के अनुसार 1977 की तुलना में 1907 में कीमतें 70% बढ़ गई थीं। इसका अर्थ यह है कि मुद्रा का मूल्य 70% कम हो गया है।

(6) भार (Weighting) - यदि निर्देशांक बनाने में भार देना आवश्यक हो तो उसकी मात्रा निर्धारित करने में बड़ी सावधानी रखनी चाहिए। उपभोग की सबसे अधिक महत्वपूर्ण वस्तुओं का भार अंक अधिक तथा ऐसी वस्तु जो उपभोग में कम आती है उसको भार अंक कम देना चाहिए।

निर्देशांक बनाने में कठिनाइयाँ (Difficulties in Construction of Index Number)

एक सही और उपयुक्त निर्देशांक बनाते समय कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जो निम्नलिखित हैं :
(1) आधार-वर्ष के चुनाव में कठिनाई-एक ऐसे वर्ष के चुनाव में, कठिनाई पड़ती है, जिसे आधारवर्ष माना जा सके, जिसमें कोई भी विषम परिस्थिति उत्पन्न न हुई हो और कोई असाधारण घटना न घटी हो। यह भी स्मरणीय होगा कि आधारवर्ष भी समय-समय पर बदलता रहता है। इस कठिनाई को दूर करने के लिए विदेशों में सामान्यतः पाँच वर्षों के मूल्य स्तर का औसत लेकर उसे आधारवर्ष मानते हैं। 
(2) प्रतिनिधि वस्तुओं के चुनाव में कठिनाई समय बीतने के साथ व्यक्तियों की आदत, रुचि, स्वभाव व फैशन आदि बदलती रहती हैं, जिसके कारण प्रतिनिधि वस्तुओं को चुनना कठिन होता है।

(3) वस्तुओं के मूल्य संग्रह में कठिनाई-एक तो प्रत्येक वस्तु की कीमत प्राप्त करना आसान नहीं है; दूसरे, निर्देशांक बनाते समय उनकी फुटकर कीमतें संग्रहीत की जाएँ अथवा थोक कीमतें। फुटकर कीमतों और थोक कीमतों में परिवर्तन भी एक साथ नहीं होता ।

(4) वस्तुओं को भार देने में कठिनाई - भारशील निर्देशांक तैयार करते समय कौन-सी वस्तु को कितना भार दिया जाय ? यह मालूम करना कठिन है, क्योंकि समय-समय पर मनुष्यों की रुचियों के अनुसार वस्तुओं का महत्व भी बदलता रहता है।

(5) तुलना-कार्य असुविधाजनक है-इसका प्रधान कारण यह है कि (i) प्रत्येक वस्तु की उपयोगिता, प्रत्येक स्थान और समय में एक-सी नहीं होती है, (ii) बहुत-सी नई-नई वस्तुएँ भी कालान्तर में बिकने के लिए आ सकती हैं, (iii) कुछ वस्तुएँ ऐसी भी होती हैं जो एक ऋण में उपयोगी और दूसरी में अनुपयोगी होती हैं। इन सब बातों के कारण निर्देशांकों का तुलनात्मक अध्ययन त्रुटिपूर्ण होगा।

(6) औसत निकालने में कठिनाई-किस रीति द्वारा औसत निकाला जाय, यह एक कठिन प्रश्न है क्योंकि परिवर्तन करने से एक वस्तु के भिन्न-भिन्न निर्देशांक प्राप्त होते हैं।

निष्कर्ष-उक्त कठिनाइयों के कारण प्रायः सच्चे व वास्तविक निर्देशांक प्राप्त नहीं हो पाते हैं और ये निर्देशांक मूल्य-स्तर या मुद्रा के मूल्य के परिवर्तनों को ठीक-ठीक नाप नहीं पाते हैं। 


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