समष्टि अर्थशास्त्र

समष्टि अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र की एक शाखा है, जिसके अंतर्गत संपूर्ण अर्थव्यवस्था या आर्थिक इकाइयों के समुच्चओं का अध्ययन किया जाता है। सभी समष्टि अर्थशास्त्रीय अध्ययन व्यष्टि अर्थशास्त्रीय चरों को समझने में सहायक हो सकते हैं। ये अध्ययन आर्थिक नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण में सहायक हो सकते हैं।यह राष्ट्रीय आय, जीडीपी , राष्ट्रीय उपभोग व्यय आदि जैसी सामान्यीकृत अवधारणाओं से संबंधित है। ऐसा एक उदाहरण जीएसटी है , जिसने सरकारी बजट में पूरी तरह से सुधार किया और कीमतों में बदलाव के कारण अर्थव्यवस्था के उपभोग व्यय को बदल दिया। देशों की आर्थिक स्थिति की तुलना करते समय हम नियमित रूप से जीडीपी जैसे शब्द सुनते हैं।

समष्टि अर्थशास्त्र के दो मुख्य उपकरण हैं - समग्र आपूर्ति और समग्र मांग। इसे आय सिद्धांत के नाम से भी जाना जाता है।

प्रो. स्‍टेनले के अनुसार,'' समष्टि अर्थशास्‍त्र का संबंध समूह के योगों के आर्थिक व्‍यवहार को समझने से है।''

प्रो. गार्डनर एक्‍लें के शब्‍दों में,'' वृहत अर्थशास्‍त्र का संबंध एक अर्थव्‍यवस्‍ता के उत्‍पादन की  कुल मात्रा जैसे चरों से इनके प्रसाधनों से प्रयोग की सीमा से राष्‍ट्रीय आय  के आधार एवं सामान्‍य मूल स्‍तर से है।''

प्रो. के.ई बोल्डिंग के अनुसार,'' वृहत अर्थशास्‍त्र विषक का वह भाग है शाखा है जो वृहत के प्रमुख योगों और औसतों का, न इसकी विशेष मदों का अध्‍ययन करता  है और इन योगों की एक उपयोगी ढ़ंग से परिभाषा देने तथा यह पता लगाने का  प्रयास करता  है  कि ये आपस में किस प्रोस से सम्‍बन्धित  है और किस प्रकार  निर्धारित होते है।''

प्रो. जे.एल हैन्‍सन के अनुसार,'' वृहत अर्थशास्‍त्र अर्थशास्‍त्र की  वह शाखा है जो वृहत योगो जैसे कि रोजगार, कुल आय एवं बचत, राष्‍ट्रीय आय एवं व्‍यय के पारस्‍परिक संबंध पर विचार करता है।''

प्रो. के.के.डेविड के अनुसार,'' समष्टि अर्थशास्‍त्र को आय सिद्धांत से भी सम्‍बोधित किया जा सकता है जो कि समस्‍त उत्‍पादन के स्‍तर को बताता है तथा यह भी स्‍पष्‍ट करता है कि यह स्‍तर क्‍यों बढ़ता एवं घटता रहता है।''

समष्टि अर्थशास्‍त्र की विशेषताएं 

समष्टि अर्थशास्‍त्र की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. अन्‍तर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार 

अन्‍तर्राष्‍टीय व्‍यापार क्षेत्र में समष्टि अर्थशास्‍त्र निर्यातों- आयातों की समस्‍याओं, भुगतान संतुलन एवं विदेशी समस्‍याओं का अध्‍ययन करता है।

2. मौद्रिक क्षेत्र 

समष्टि अर्थशास्‍त्र मुद्रा के परिणाम  सिद्धांत, मुद्रा स्‍फीति उवं मुद्रा विस्‍फीति आादि  का  सामान्‍य मूल्‍य स्‍तर पर पड़ने वाले प्रभावों का  अध्‍ययन करती है। 

3. व्‍यापार चक्र 

व्‍यावसायिक चक्रों के क्षेत्र में समष्टि अर्थशास्‍त्र, समग्र एवं समग्र रोजगार पर पड़ने वाले विनियोग के प्रभाव को विश्‍लेषण प्रदान करता है।

4. परिवर्तनशील समष्टि इकाइयां 

समष्टिगत अर्थशास्‍त्र में समष्टि इकाइयां जैसे राष्‍ट्रीय, आय कुल उत्‍पादन, कुल रोजगार, सामान्‍य कीमत स्‍तर आदि को परिवर्तनशील माना जाता है।

5. विकास 

अंत में समष्टि अर्थशास्‍त्र ऐसे कारकों का अध्‍ययन  करता है  जो आर्थिक विकास को बाधा  पहुंचाते है।

6. परस्‍पर निर्भरता

व्‍यक्तिगत साम्‍य स्‍तर के परिवर्तन का प्रभाव  अन्‍य इकाइयों पर नही पड़ता, जबकि समष्टिगत मात्रायें परस्‍पर इतनी समबद्ध होती है कि एक में परिवर्तन करने पर अन्‍य मात्राओं के साम्‍य स्‍तर पर भी परिवर्तन होगें।

7. समग्र स्‍वरूप 

जब हम सम्‍पूर्ण अर्थव्‍यवस्‍ता का विश्‍लेषण करते है तो यह समष्टि आर्थिक अध्‍ययन होता है यह सम्‍पूर्ण अर्थव्‍यवस्‍ता को एक ही दृष्टि से देखता है।

8. समष्टिगत मात्रायें

समष्टि अर्थशास्‍त्र में समष्टिगत मात्रायें, व्‍यष्टिगत मात्राओं का योग नही है और इसी प्रकार समष्टिगत मात्रा में व्‍यक्तिगत इकाइयों की कुल संख्‍या  का भागदेने पर व्‍यष्टिगत मात्रा प्राप्‍त नही की जा सकती, क्‍यो‍कि दोनो प्रकार की मात्राओं का अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है।

9. बेरोजगारी 

समष्टि अर्थशास्‍त्र देश की बेरोजगारी की समस्‍याओं से संबंधित होता है। इसके भीतर बेरोजगारी व निर्धारक तत्‍वों का अध्‍ययन किया जाता है।

10. सम्‍पूर्ण अर्थव्‍यवस्था से संबंधित

समष्टि अर्थशास्‍त्र में सम्‍पूर्ण अर्थव्‍यवस्‍ता से संबंधित नीतियों का अध्‍ययन किया जाता है। इसके साथ-साथ इन समष्टि नीतियों का प्रभाव किसी एक व्‍यक्तिगत इकाई पर नही देखा जाता, सम्‍पूर्ण समाज पर पड़नेवाले प्रभाव का विश्‍लेषण ही समष्टि अर्थशास्‍त्र के अन्‍तर्गत ही  किया जाता  है। 


समष्टि अर्थशास्त्र का महत्व अथवा आवश्यकता 

व्यापक अर्थशास्त्र का प्रयोग एवं महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। सूक्ष्य अर्थशास्त्र की कमियों एवं सीमाओं के कारण व्यापक अर्थशास्त्र की उपयोगिता और भी अधिक बढ़ती जा रही है। संक्षेप मे इसके महत्व को निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है--

1. अर्थव्यवस्था के संचालन को समझने के लिए 

हमारी मुख्य आर्थिक समस्याएं कुल आय, कुल उत्पादन, रोजगार, सामान्य कीमत स्तर, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, विदेशी विनिमय आदि से संबंधित है। इन सबके लिए व्यापक अर्थशास्त्र की जरूरत है, कारण कि व्यापक अर्थशास्त्र मे समूची अर्थव्यवस्था तथा उससे संबंधित बड़े योगों एवं औसत का अध्ययन किया जाता है।

2.जटिलताओं को कम करना

समष्टिगत विश्लेषण के द्वारा अर्थव्यवस्था की जटिलताओं को सरलता से समझा जा सकता है। विभिन्न आर्थिक घटकों के पारस्परिक संबंधो को समझने की यह विधि सबसे सरल है।

3. आर्थिक नीतियों के निर्माण के लिए 

आर्थिक नीतियों का संबंध व्यक्ति विशेष से न होकर सम्पूर्ण समुदाय या समूची अर्थव्यवस्था से होता है। सरकार का मुख्य दायित्व अति- जनसंख्या, सामान्य कीमतें, राष्ट्रीय आय, व्यापार के सामान्य स्तर, कुल रोजगार आदि को नियन्त्रित करना है। कोई भी सरकार इन समस्याओं को व्यक्तिगत स्तर पर हल नही कर सकती है। इसके व्यापक आर्थिक विश्लेषण की आवश्यकता होती है।

4. समस्याओं का समाधान 

समष्टिगत विश्लेषण न केवल समस्याओं को समझने के लिये उपयुक्त है, बल्कि राष्ट्रीय आय, रोजगार, पूंजीके लिये उपयुक्त है, बल्कि राष्ट्रीय आय, रोजगार, पूंजी निर्माण, आर्थिक विकास, जनसंख्या आदि से संबंधित विभिन्न समस्याओं का समाधान करने मे भी योगदान देता है।

5 सामान्य बेकारी दूर करने के लिए 

कीन्स के रोजगार सिद्धांत के अनुसार रोजगार का स्तर प्रभावपूर्ण माँग पर निर्भर होता है। प्रभावपूर्ण उन तत्वों पर निर्भर होती है जो कुल मांग एवं कुल पूर्ति को प्रभावित करते है। इसलिए प्रभावपूर्ण मांग की वृद्धि करने के लिए विनियोग, कुल उत्पादन, कुल आय एवं कुल उपभोग को बढ़ाना जरूरी है। अतः बेरोजगारी के कारणों, प्रभावों एवं उपचारों को व्यापक आर्थिक विश्लेषण द्वारा ही समझा जा सकता है।

6. आर्थिक विकास के लिए

आर्थिक विकास के स्तर को ऊँचा करने के लिएअर्थव्यवस्था के साधनों का अनुमान लगाकर, उनका उपभोक्ता वस्तुओं एवं पूंजीगत वस्तुओं के बीच उचित वितरण करने के लिए उससे संबंधित समस्याओं का अध्ययन व्यापक अर्थशास्त्र मे ही किया जा सकता है।

7. मौद्रिक समस्याएं हल करने के लिए 

मुद्रा संबंधी समस्याओं-- मुद्रा प्रसार, मुद्रा संकुचन का विश्लेषण एवं समझना व्यापक आर्थिक विश्लेषण से ही संभव है।

8. राष्ट्रीय आय की गणना एवं सामाजिक लेखांकन 

समष्टिगत विश्लेषण के द्वारा ही राष्ट्रीय आय की गणना संभव है। राष्ट्रीय आय के क्षेत्रानुसार वर्गीकरण के द्वारा ही यह जानकारी मिलती है कि विभिन्न क्षेत्रों का योगदान कितना है? सामाजिक लेखांकन-विधि समष्टिगत विश्लेषण पर ही आधारित है।

9. व्यापार चक्र रोकने के लिए 

एक गतिशील अर्थव्यवस्था की प्रमुख समस्याओं, जैसे-- आर्थिक उच्चावचन राष्ट्रीय आय आदि के विश्लेषण, समाधान ढूंढने एवं उनके संबंध मे व्यावहारिक नीति के निर्देश मे व्यापक आर्थिक विश्लेषण की विधि बड़ी सहायक है।

10. मुद्रा स्फीति एवं संकुचन के प्रभावों का अध्ययन 

समष्टि विश्लेषण के द्वारा ही अर्थव्यवस्था मे होने वाली मुद्रा-स्फीति एवं संकुचन के प्रभावों का अध्ययन किया जा सकता है तथा बुरे प्रभावों से बचने के उपाय खोजे जा सकते है।

11. सूक्ष्म अर्थशास्त्र के विकास मे सहायक

सूक्ष्म अर्थशास्त्र विभिन्न नियमों एवं सिद्धांतों का प्रतिपादन करता है, किन्तु ऐसा करने मे उसे व्यापक अर्थशास्त्र की सहायता लेनी पड़ती है।  उदाहरण के लिए-- उपयोगिता ह्रास नियम व्यक्तियों के समूहों के व्यवहार की विवेचना से ही प्रतिपादित किया जा सकता है। एक फर्म के सिद्धांत का निर्माण बहुत-सी फर्मों के व्यवहार का सामूहिक रूप से अध्ययन करके ही किया जा सकता है।

12. अनेक समस्याओं का व्यष्टिगत अर्थशास्त्र द्वारा समाधान नही 

अर्थशास्त्र मे अनेक ऐसी समस्याएं है जिनका अध्ययन व्यष्टिगत या सूक्ष्म विश्लेषण के द्वारा नही हो पाता है, जैसे राजस्व, विदेशी व्यापार, मुद्रा, बैंकिंग इत्यादि। इस समस्याओं के अध्ययन हेतु समष्टिगत विश्लेषण जरूरी है।

समष्टि अर्थशास्त्र की सीमाएं या दोष 

समष्टि अर्थशास्त्र आर्थिक विश्लेषण एवं नीतियों के निर्धारण हेतु काफी महत्वपूर्ण माना जाता है फिर भी इसमे कुछ दोष व कमियां पायी जाती है जिन्हे वृहत् अर्थशास्त्र सीमाएं भी कह सकते है। इनको निम्न बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है--

1. व्यक्तिगत इकाइयों से निकाले गये निष्कर्ष सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर लागू नही होते 

ऐसे निष्कर्ष जो व्यक्तिगत इकाइयों या व्यक्तियों के छोटे समूह के अध्ययन से निकाले गये है, सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था मे लागू नही हो सकते, यदि ऐसे निष्कर्षों को अन्धाधुन्ध संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर लागू कर दिया जाये तो वे खतरनाक और हानिकारक हो सकते है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति बैंक मे अपनी जमा राशि को निकाल लेता है तो कोई विशेष बात नही है, परन्तु इस प्रवृत्ति को समस्त व्यक्ति प्रयोग मे लाते है तो बैंक फेल हो जायेगी और इसका प्रभाव अन्य बैंकों पर भी पड़ेगा।

2. समूह से निकाले गये निष्कर्ष भ्रामक होते है

समूह के अध्ययन को अत्यधिक महत्व देना खतरनाक भी हो सकता है, क्योंकि सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था का निर्माण व्यक्तिगत इकाइयों तथा छोटे समूह के आधार पर ही होता है।

3. समूहों मे एकरूपता न होना 

सभी समूहों मे एकरूपता एवं सजातीयता नही पाई जाती किन्तु सही निष्कर्षों पर तभी पहुंचा जा सकता हैजब अध्ययन मे सम्मिलित किये गये समूह सजातीय हो।

4. परिणाम को मापने मे कठिनाई

वृहत अर्थशास्त्र मे युगों के मापने की समस्या उत्पन्न होती है अर्थात् भिन्न-भिन्न स्वभाव वाली वस्तुओं को किस प्रकार एक रूप मे व्यक्त किया जाये यह एक समस्या है।

5. समूह की अपेक्षा समूह की रचना अधिक महत्वपूर्ण होती है

समूह की अपेक्षा समूह की बनावट, रचना तथा अंगो का अधिक महत्व होता है इसलिए समस्या का समाधान तभी हो सकता है, जब हम योग अथवा समूह को अलग-अलग भागों मे तोड़कर इनकी क्रियाओं का पृथक-पृथक रूप से विश्लेषण करें।

व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर

व्यष्टि अर्थशास्त्र व समष्टि अर्थशास्त्र

1.व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों का अध्ययन किया जाता है।

समष्टि अर्थशास्त्र में सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था का एक समग्र इकाई के रूप में अध्ययन किया जाता है। 

2.व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत फर्म, उद्योग या व्यापारिक इकाई में तेजी व मंदी की विवेचना होती है। समष्टि अर्थशास्त्र के द्वारा सम्पूर्ण आर्थिक मंदी का तथा आर्थिक तेजी का स्पष्टीकरण किया जाता है। 

3.उपभोक्ता या फर्म को सर्वोत्तम बिन्दु तक पहुँचाने में व्यष्टि अर्थशास्त्र सहायता पहुँचाता है। सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को सर्वोत्तम बिन्दु तक पहुँचाने में समष्टि अर्थशास्त्र विशेष सहायक होता है।

4.व्यष्टि अर्थशास्त्र का क्षेत्र सीमान्त विश्लेषण आदि पर आधारित नियमों तक सीमित है। समष्टि अर्थशास्त्र का क्षेत्र राष्ट्रीय आय, पूर्ण रोजगार, राजस्व आदि सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित समस्याओं के विश्लेषण से व्यापक है। 

5.व्यष्टि अर्थशास्त्र एक मात्र व्यक्तिगत समस्याओं का ही समाधान प्रस्तुत करता है। समष्टि अर्थशास्त्र सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था की समस्याओं का विश्लेषण कर समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।

6.व्यष्टि अर्थशास्त्र केवल एक स्थान विशेष के लिए ही उपयोगी है। समष्टि अर्थशास्त्र की अन्तर्राष्ट्रीय उपयोगिता है।

7.व्यष्टि अर्थशास्त्र कीमत विश्लेषण से सम्बन्ध रखता हैं। समष्टि अर्थशास्त्र का लक्ष्य आय का विश्लेषण करना है।

8.व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत कीमत, उत्पादन, उपभोग आदि की ओर निर्देश देता है। समष्टि अर्थशास्त्र सामान्य कीमत स्तर, राष्ट्रीय आय और सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था की ओर निर्देश देता है।


Comments

Popular posts from this blog

sem 6 unit 1

समावेशी विकास

आर्थिकविकास और आर्थिक वृद्धि