Multidimensional poverty index
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) 2023 जारी किया गया है। यह “प्रत्यक्ष रूप से किसी व्यक्ति के जीवन और कल्याण को प्रभावित करने वाले स्वास्थ्य, शिक्षा एवं जीवन स्तर के परस्पर संबंधित अभावों को मापता है”। भारत ने गरीबी उन्मूलन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, केवल 15 वर्षों के भीतर उल्लेखनीय संख्या में लोग गरीबी से बाहर आ गए हैं।
वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक:
- परिचय:
- यह सूचकांक एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संसाधन है जो 100 से अधिक विकासशील देशों में तीव्र बहुआयामी गरीबी को मापता है।
- इसे प्रथम बार वर्ष 2010 में OPHI तथा UNDP के मानव विकास रिपोर्ट कार्यालय द्वारा प्रारंभ किया गया था।
- MPI स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के विभिन्न 10 संकेतकों में अभावों की निगरानी करता है और इसमें गरीबी की घटना और तीव्रता दोनों शामिल हैं।
- यह सूचकांक एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संसाधन है जो 100 से अधिक विकासशील देशों में तीव्र बहुआयामी गरीबी को मापता है।
- इसे प्रथम बार वर्ष 2010 में OPHI तथा UNDP के मानव विकास रिपोर्ट कार्यालय द्वारा प्रारंभ किया गया था।
- MPI स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के विभिन्न 10 संकेतकों में अभावों की निगरानी करता है और इसमें गरीबी की घटना और तीव्रता दोनों शामिल हैं।
राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक:
यह रिपोर्ट नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (वर्ष 2019-21) के आधार पर तैयार की गई है तथा राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) का दूसरा संस्करण है।
MPI का पहला संस्करण वर्ष 2021 में जारी किया गया था।
MPI अपने कई आयामों में गरीबी को मापने का प्रयास करता है तथा प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय के आधार पर मौजूदा गरीबी के आँकड़ों का पूरक है।यह "प्रत्यक्ष रूप से किसी व्यक्ति के जीवन और कल्याण को प्रभावित करने वाले स्वास्थ्य, शिक्षा एवं जीवन स्तर के परस्पर संबंधित अभावों को मापता है"।
इसके तीन समान महत्त्व वाले आयाम हैं- स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर।
इन तीन आयामों को पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत, आवास, संपत्ति और बैंक खाते जैसे 12 संकेतकों द्वारा दर्शाया जाता है।
प्रमुख बिंदु:
- वैश्विक परिदृश्य:
- विश्व स्तर पर 110 देशों के 6.1 अरब लोगों में से 1.1 अरब लोग (कुल जनसंख्या का 18%) बहुआयामी रूप से अत्यंत गरीब हैं।
- उप-सहारा अफ्रीका में गरीबों की संख्या 534 मिलियन है और दक्षिण एशिया में यह संख्या 389 मिलियन है।
- इन दोनों क्षेत्रों में प्रत्येक छह लोगों में से लगभग पाँच लोग गरीब हैं।
- MPI आधारित गरीब लोगों में से आधे यानी 566 मिलियन 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं।
- बच्चों में गरीबी दर 27.7% है, जबकि वयस्कों में यह 13.4% है।
- विश्व स्तर पर 110 देशों के 6.1 अरब लोगों में से 1.1 अरब लोग (कुल जनसंख्या का 18%) बहुआयामी रूप से अत्यंत गरीब हैं।
भारत के संदर्भ में: - भारत में गरीबी: भारत में अभी भी 230 मिलियन से अधिक लोग गरीब हैं।
- UNDP के अनुसार, "संवेदनशीलता" को उन लोगों के हिस्से के रूप में परिभाषित किया गया है जो गरीब नहीं हैं लेकिन सभी भारित संकेतकों के 20 - 33.3% में वंचित हैं। उनकी भेद्यता हिस्सेदारी बहुत अधिक हो सकती है।
- भारत की लगभग 18.7% आबादी इस श्रेणी में है।
- गरीबी उन्मूलन में भारत की प्रगति: भारत कंबोडिया, चीन, कांगो, होंडुरास, इंडोनेशिया, मोरक्को, सर्बिया और वियतनाम सहित 25 देशों में से एक है जिन्होंने 15 वर्षों के भीतर अपने वैश्विक MPI मूल्यों को सफलतापूर्वक आधा कर दिया है।
- UNDP के अनुसार, "संवेदनशीलता" को उन लोगों के हिस्से के रूप में परिभाषित किया गया है जो गरीब नहीं हैं लेकिन सभी भारित संकेतकों के 20 - 33.3% में वंचित हैं। उनकी भेद्यता हिस्सेदारी बहुत अधिक हो सकती है।
- भारत की लगभग 18.7% आबादी इस श्रेणी में है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
- बहुआयामी गरीबी में कमी:
- वर्ष 2015-16 और वर्ष 2019-21 के बीच भारत में बहुआयामी गरीब व्यक्तियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
- इस अवधि में लगभग 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले।
- गरीबी प्रतिशत में गिरावट:
- बहुआयामी गरीबी में जीने वाली भारत की जनसंख्या वर्ष 2015-16 के 24.85% से घटकर वर्ष 2019-21 में 14.96% हो गई, यह 9.89% अंकों की गिरावट दर्शाती है।
- ग्रामीण-शहरी विभाजन:
- भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी में सबसे तेज़ गिरावट देखी गई है, वर्ष 2015-16 और 2019-21 के बीच गरीबी दर 32.59% से गिरकर 19.28% हो गई।
- इसी अवधि में शहरी क्षेत्रों में गरीबी दर 8.65% से घटकर 5.27% हो गई।
- राज्य स्तरीय प्रगति:
- MPI गरीबों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश में गरीब व्यक्तियों की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई, जहाँ 3.43 करोड़ (34.3 मिलियन) लोग बहुआयामी गरीबी से मुक्त हुए।
- बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिसा और राजस्थान राज्यों में भी बहुआयामी गरीबी को कम करने में महत्त्वपूर्ण प्रगति देखी गई।
- बिहार में पूर्ण रूप से MPI मूल्य में सबसे तेज़ गिरावट (वर्ष 2019-21 में बहुआयामी गरीबों की 51.89% से घटकर 33.76%) देखी गई, इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का स्थान है
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