SEBI

सेबी की भूमिका और उपलब्धियां (Role and Achievements of SEBI)

31 मार्च, 1992 में भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (SEBI) की स्थापना भारत में पूंजी बाजार के कार्यकरण के लिए एक स्वाय और वैधानिक निकाय के रूप में हुई थी। यह नये शेयरों, डिबेंचरों और बांडों के इश्यू को नियमित करता है, निवेशकों के हितों की रक्षा करता है, पूंजी बाजार के विकास को प्रोत्साहित करता है और स्टॉक एक्सचेंजों के कार्यकरण को नियमित करता है। यह निम्न प्रकार से एक आधुनिक, कुशल, पारदर्शी, स्वच्छ और सुरक्षित एवं निवेशक-हितकारी पूंजी बाजार निवकसित करने का प्रयास कर रहा है। प्राथमिक बाजार सुधार (Primary Market Reforms)

सेबी ने नये शेयरों और डिबेंचरों के इश्यू करने की प्रक्रियाओं की अपर्याप्तताओं और कमियों को दूर करने के लिए प्राथमिक बाजार सुधारों को सफलतापूर्वक अपनाया है। अब एक शेयर की कीमत निर्धारण और प्रीमियम में पारदर्शिता होती है। शेयर जारी करनेवाली कंपनियों के लिए अपनी परिचय पुस्तिका (prospectus) में सभी भौतिक तथ्यों और जोखिम घटकों को प्रकट करना आवश्यक होता है।

द्वितीयक बाजार के कार्यकरण में कुशलता लाने के लिए सेबी ने द्वितीयक बाजार में मध्यस्थ के लिए विशिष्ट नियमों और नियमनों को रखा है। ऐसे मध्यस्थों के अन्तर्गत मर्चेंट बैंकर, निवेश सूची प्रबंधक, हामीदार (underwriters), रजिस्ट्रार, दलाल और उपदलाल

द्वितीयक बाजार सुधार (Secondary Market Reforms) एवं शेयर स्थानांतरण एजेंट आते हैं। उनके लिए विशेष पूंजी पर्याप्तता मानकों (capital adequacy norms) को अपनाना, निश्चित पात्रता कसौटियों को पूरा करना और निवेशकों के प्रति आचरण के नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। वे चूक (default) की स्थिति में सेबी द्वारा दंडित भी किए जाते हैं।

संस्थागत और बाजार विकास में सहायता (Help in Institutional and Market Development) सेवों ने द्वितीयक बाजार में संस्थागत और बाजार विकास की प्रक्रिया में सहायता की है। यह स्टॉक एक्सचेंजों को सिर पर

'बाजार निर्माता' (market makers) की स्वीकृति देता है। बाजार निर्माता शेयरों में व्यापार कर उनमें तरलता प्रदान करते हैं और शेयर- कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकते हैं।

सेबी ने भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भागीदारों को प्रोत्साहित किया है। इसने स्टॉक एक्सचेंजों में उनके पंजीकरण और प्रचालन (operations) की प्रक्रिया को सरल बनाया है। FIls को पूंजी, पूंजीलाभों, लाभांशों और शेयरों एवं डिबेंचरों पर ब्याज को स्वदेश भेजने या उससलौटाने की अनुमति दी गई है। सेबी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इण्डिया (NSEI) सहित विभिन्न स्टॉक एक्सचेंजों को उनके कार्यकरण में सुधार लाने और उन्हें

निवेशकों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल बनाने हेतु उनके कुशल प्रचालन के लिए दिशानिर्देश जारी करती है।

संस्थाओं के कार्यकरण का नियमन (Regulating the Working of Institutions)

सेबी कई संस्थाओं जैसे म्यूचुअल फंड, मुद्दा बाजार म्यूचुअल फंड, मर्चेंट बैंकर्स, निवेश सूची प्रबंधक आदि के कार्यकरण का नियमन करती है। उनके कार्यकरण का नियमन कर सेबी ने भारत में प्राथमिक और द्वितीयक पूंजी बाजारों के कार्य में सुधार लाने की

कोशिश की है। स्टॉक एक्सचेंजों का आधुनिकीकरण (Modernisation of Stock Exchanges)

सेखी ने भारत में स्टॉक एक्सचेंजों के समस्त प्रचालनों का आधुनिकीकरण किया है। सभी स्टॉक एक्सचेंज कम्प्यूटरीकृत किए गए, हैं। स्टॉक बाजार का लेन-देन 100% कम्प्यूटरीकृत और ऑन लाइन है। अमेरिका और जापान सहित विश्व के कई विकसित देशों में यह व्यापार पूर्ण कम्प्यूटरीकृत नहीं है तथा उनके व्यापार का अधिकांश भाग अभी भी स्टॉक एक्सचेंज के फर्श पर होता है। सेबी की यह एक बड़ी उपलब्धि है। सभी 23 स्टॉक एक्सचेंजों में इलेक्ट्रॉनिक व्यापार प्रारंभ हो जाने से लेन-देन लागत कम हो गई है।

शेयरों का अमूर्तिकरण (Dematerialisation of Shares)

सरकार ने 1996 ई. में राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लि. (National Securities Depository Limited— NSDL) और कई निक्षेपागार (depository) भागीदारों की स्थापना निक्षेपागार द्वारा एक निक्षेपागार प्रणाली प्रारंभ की। इसका उद्देश्य स्टॉक एक्सचेंजों में गैर-कागजी (paperless) लेन-देन को प्रारंभ करना था। परन्तु इसकी प्रगति मन्द गति से हुई। इसलिए सेवी ने व्यापार के लिए शेयरों के अमूर्तिकरण की आवश्यकता को अनिवार्य किया है। ऐसा प्रतिदिन बड़े पैमाने पर व्यापार किए जाने वाले शेयरों के लिए स्टेजों में किया गया है। इन दिनों स्टॉक एक्सचेंजों में 50% से अधिक व्यापार अमूर्तिकृत रूप में होता है। शेयरों के अमूर्तिकरण ने विशेषकर FIls द्वारा व्यापार को प्रोत्साहित किया है क्योंकि यह शेयर लेने या जाली शेयरों और अनूचित सुपुदंगियों के भय को दूर करता है। इसने हस्तान्तरण समस्याओं को भी दूर किया है।

इंटरनेट व्यापार (Internet Trading)

सेबी ने ग्राहकों की ओर से पंजीकृत स्टॉक दलालों के द्वारा ऑर्डर प्रणाली (ORS) के अन्तर्गत इंटरनेट व्यापार की अनुमति दी है। इस प्रकार, इसने निवेशकों को अपने कम्प्यूटरों पर इंटरनेट के द्वारा शेयर खरीदने और बेचने की सुविधा प्रदान की है। यह भारत के स्टॉक एक्सचेंजों में शेयरों के व्यापार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

डेरिवेटिव्स व्यापार (Derivatives Trading)

प्रतिभूतियों में डेरिवेटिव्स व्यापार प्रारंभ होने से द्वितीयक बाजार का आधुनिकीकरण हुआ है। अब देश में नकद बाजार, अग्रिम (forward) बाजार और बदला प्रणाली होती है। निवेशकों की शिकायतें दूर करना (Solving Investor's Complaints)

सेबी ने एक पृथक निकाय (cell) की स्थापना की है जहां निवेशकों से शिकायतें प्राप्त की जाती हैं और उनका हल निकाला जाता है। सेबी के अनुसार प्रतिवर्ष दो लाख से अधिक निवेशक कंपनियों के विरुद्ध हस्तांतरण, शेयर सर्टिफिकेट को गैर-प्राप्ति, लाभां डिवेंचरों पर ब्याज आदि से संबंधित शिकायतें करते हैं। इनमें से लगभग 90% शिकायतों का समाधान सेवी करती है। सेवी डीमैट के अन्तर्गत आने वाले और अधिक शेयरों से ऐसी शिकायते दूर करने की आशा करती है।

सुरक्षा उपाय (Safety Measures)

सेबी ने निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कई उपाय किए हैं। कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शेयर/डिबेंचर धारक से बैंक खाता संख्या को मांग करें और उसकी चर्चा ब्याज / लाभांश प्रमाण-पत्र पर करें या इसे सीधा उसके बैंक खाते में जमा करें। इसने निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए निवेशक संरक्षण निधि (Investors Protection Fund) और व्यापार गारंटी निधि (Trade Guarantee Fund) की स्थापना करने में स्टॉक एक्सचेंजों का मार्गदर्शन किया है। आगे इसने व्यापार निपटान के लिए समाशोन निगम
Clearning Corporation) की स्थापना की है। इसके अतिरिक्त, इसने खराब सुपुर्दगी के बावजूद दलाल के लिए 21 दिन के भीतर भुगतान अनिवार्य कर दिया है। इस प्रकार कोई निवेशक अपना पैसा नहीं गंवा सकता। सर्किट ब्रेकर प्रणाली (Circuit Breaker System)

सेबी ने एकल स्टॉकों (Individual stocks) बाजार के उतार-चढ़ाव पर आधारित एक सर्किट ब्रेकर प्रणाली को प्रारंभ किया है। इस प्रणाली के अनुसार, यदि किसी स्टॉक में बाजार गतिशीलता एक निश्चित सीमा को पार करती है तो इस स्टॉक में व्यापार कुछ दिनों के लिए रोक दिया जाता है ताकि सट्टेबाज इसका अनुचित लाभ न उठा सकें। यह अमेरिकन सर्किट ब्रेकर प्रणाली से अधिक अच्छी प्रणाली है जो स्टॉकों के सूचक से संबंधित है। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज आधे घंटे या उससे अधिक समय के लिए बंद हो जाता है जब कभी बाजार गतिशीलता सूचक सीमा को पार कर जाती है। इस प्रकार, सेबी ने एक बेहतर सर्किट ब्रेकर प्रणाली का विकास किया है जिसमें स्टॉक एक्सचेंज बंद करने की आवश्यकता नहीं होती।

निष्कर्ष (Conclusion)

सेबी ने प्राथमिक बाजार सुधार प्रारंभ करने के अतिरिक्त, द्वितीयक बाजार में निवेशकों को रुचि और विश्वास बढ़ाने, इसको कुशलता एवं निवेशक संरक्षण क्षमता को बढ़ाने के कई उपाय किए हैं। इन उपायों में डीमैट, डेरिवेटिव्स, आंतरिक व्यापार, बाजार निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक व्यापार एवं ऑर्डर मेचिंग प्रणाली, चुनिंदा शेयरों में रॉलिंग निपटान, इन्टरनेट व्यापार, आदि शामिल हैं। इस प्रकार सेबी ने नये उपकरणों और कुशल निपटान तंत्र का विकास, संस्थागत बुनियादी ढांचे को मजबूत, भागीदार आधार का विस्तार और प्रचालनों की पारदर्शिता में सुधार किया है।







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