उपयोगिता

उपयोगिता
किसी वस्तु या सेवा का उपभोग करने से हमें जो संतुष्टि प्राप्त होती हैं, उसे ही उपयोगिता कहते हैं
एक अच्छे उपभोक्ता के लिए समय के विभिन्न बिंदुओं, उपभोग के विभिन्न स्तरों और उपभोक्ताओं की रुचि के लिए उपयोगिता भी अलग अलग हो सकती है। इसलिए, उपभोक्ता विश्लेषण के लिए उपयोगिता की व्यक्तिपरक अवधारणा का उपयोग किया जाता है।उपयोगिता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं- 
⦁    उपयोगिता का सम्बन्ध वस्तु या सेवाओं की उस शक्ति से होता है, जो आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करती है। 
⦁    किसी वस्तु या सेवा का उपभोग व्यक्ति को लाभ प्रदान कर रहा है। या हानि, इससे उपयोगिता का कोई लेना-देना नहीं होता है। ⦁    उपयोगिता किसी वस्तु का उपभोग करने पर ही प्राप्त होती है। अत: उपयोगिता का सम्बन्ध उपभोगजन्य वस्तुओं से होता है, न कि पूँजीगत वस्तुओं से। 
⦁    एक ही वस्तु की उपयोगिता भिन्न व्यक्तियों के लिए समान या भिन्न परिस्थितियों में एक व्यक्ति के लिए ही अलग-अलग हो सकती है। 
⦁    उपयोगिता किसी वस्तु का वस्तुगत गुण नहीं है। वस्तु की उपयोगिता |  इसका उपभोग करने वाले पर निर्भर करती है।


गणनावाचक उपयोगिता विश्लेषण गणनावाचक उपयोगिता विश्लेषण की मान्यता है कि उपयोगिता के स्तर को संख्याओं में व्यक्त किया जा सकता है
यद्यपि उपयोगिता एक मनोवैज्ञानिक विचार है परन्तु मार्शल तथा अन्य अर्थशास्त्रियों के अनुसार उपयोगिता को मोटे रूप से मुद्रारूपी पैमाने द्वारा मापा जा सकता है। एक व्यक्ति किसी वस्तु के लिए उपयोगिता के हिसाब से क़ीमत चुकाता है। यदि उपयोगिता अधिक होती हैं तो कीमत अधिक चुकाई जाती है। इसी प्रकार उपयोगिता कम होने पर कम कीमत चुकाई जाती है। स्पष्टशब्दों में, किसी वस्तु के लिए दी जाने वाली कीमत उस वस्तु की उपयोगिता का माप है। उदाहरणार्थ, एक व्यक्ति एक फाउण्टेन पैन के लिए 8 रूपये देने को तैयार तो उसके लिए पैन की उपयोगिता 8 रूपये के बराबर होगी। 
 उदाहरण के लिए, एक कमीज़ से प्राप्त उपयोगिता को माप सकते है, और कहें कि यह कमीज़ मुझे 50 इकाई उपयोगिता प्रदान करती है।यद्यपि उपयोगिता एक मनोवैज्ञानिक विचार है परन्तु मार्शल तथा अन्य अर्थशास्त्रियों के अनुसार उपयोगिता को मोटे रूप से मुद्रारूपी पैमाने द्वारा मापा जा सकता है। एक व्यक्ति किसी वस्तु के लिए उपयोगिता के हिसाब से क़ीमत चुकाता है। यदि उपयोगिता अधिक होती हैं तो कीमत अधिक चुकाई जाती है।
यहाँ उपयोगिता के लिए विभिन्न प्रकार की संख्यायें (1,2,3,4 इत्यादि) प्रदान कर दी जाती हैं।
इस संख्याओं को गणनावाचक संख्याएँ कहते हैं। इस संख्याओं को जोड़ा व घटाया जा सकता है जैसे किसी वस्तु की पहली इकाई से 6 के बराबर उपयोगिता प्राप्त होती है, दूसरी इकाई से 4 के बराबर व तीसरी इकाई से 2 के बराबर उपयोगिता मिलती है, तो इस प्रकार वस्तु की तीनों इकाईयों से कुल 12 इकाई।

क्रमवाचक उपयोगिता
वास्तविक जीवन में, हम उपयोगिता को संख्याओं के रूप में कभी व्यक्त नहीं करते। अधिक से अधिक हम कम या अधिक उपयोगिता के आधार पर क्रम दे सकते हैं
हिक्स और एलन ने उपयोगिता विश्लेषण के क्रमिक दृष्टिकोण का प्रतिपादन किया। उन्हें नव-शास्त्रीय अर्थशास्त्रियों के रूप में जाना जाता है। क्रमवाचक सिद्धांत में, उपयोगिता को संख्यात्मक शब्दों में नहीं मापा जा सकता है, इसे केवल रैंक या क्रमबद्ध किया जा सकता है।


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