covid_19 का कृषि व विनिर्माण पर प्रभाव

कोविड 19 का कृषि पर प्रभाव
अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित किया है। जब गेहूँ, चना, सरसों आदि जैसी फसलों की कटाई की जानी थी तब लॉकडाउन की घोषणा के कारण भारतीय कृषि पर इसका प्रभाव कृषि मूल्य श्रृंखला के विभिन्न क्षेत्रों में जटिल और विविध रहा है। यह समय सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद के लिए कृषि उपज को बाजारों तक पहुँचाने का भी था। परिवहन की अनुपस्थिति तथा खेत और मंडियों में संचालन के लिए श्रमिकों की अनुपलब्धता के कारण कृषि उपज को बाजार तक पहुँचाना तत्कालिक चुनौती के तौर पर सामने आया।

इस स्थिति से निपटने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने कटाई के बाद उपज के भंडारण और विपणन जैसे कार्यों को अधिक कुशलता से संभालने की सलाह दी। साथ ही, रबी-फसलों की कटाई और थ्रेसिंग के बारे में राज्य-विशिष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। कोविड-19 लॉकडाउन द्वारा उत्पन्न मामले की चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्र के अधिकारियों द्वारा मांग संचालित, स्थान विशिष्ट पहलों और नवाचारों को लागू किया गया था।

आर्थिक संकेतकों में सुधार

कृषि

 

सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों से गेहूं की खरीद 16 जून,2020 को अब तक के रिकॉर्ड 382 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) केआंकड़े को छू लिया है जो 2012-13 के दौरान खरीद के 381.48 एलएमटी के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया है। यह खरीदकोविड-19 महामारी के दौरान एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने (सोशल डिस्टेंसिंग) के प्रतिबंधों के बीच पूरी की गई है। इससे42 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं और गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)के रूप में इन किसानों को 73,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
16 राज्यों में एमएफपी योजना के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत लघु वन उपजों (एमएफपी) की भी 79.42 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड खरीद हुई है। यह कोविड -19 महामारी के इस संकटपूर्ण समय में जन-जातीय लोगों के लिए एक जरूरी रामबाण साबित हुआ है क्योंकि इसनेइन लोगों के जीवन और आजीविका को बाधित किया है।
 

19 जून, 2020 तक किसानों ने इस बार13.13 मिलियन हेक्टेयर खेत में खरीफ फसलों की बुवाई की है,जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 39 प्रतिशत अधिक है। इस बार तेलहन,मोटे अनाज,दलहन और कपास की बुवाई में बड़ा उछाल आया है।
 

मई 2020 (40.02 लाख टन) में उर्वरक की बिक्री में साल-दर-साल लगभग 98 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो कृषि क्षेत्र में आ रही मजबूत को दर्शाता है।विनिर्माण

भारत के पीएमआई मैन्युफैक्चरिंग एंड सर्विसेज ने अप्रैल (क्रमश: 27.4 और 5.4) की तुलना में मई मेंक्रमशः30.8 और 12.6 पर रहकर कम संकुचन दिखाया।
बिजली की खपत मेंअप्रैल में (-) 24%  सेमई में (-) 15.2 प्रतिशत से जून में (21 जून तक) (-) 12.5 प्रतिशत की कम संकुचन वृद्धि दर देखी गई। जून महीने मेंबिजली की खपत में पहले सप्ताह में (-) 19.8 प्रतिशत से दूसरे सप्ताह में (-)11.2 प्रतिशत से तीसरे सप्ताह में(-)6.2 प्रतिशत तक लगातार सुधार हुआ है।
अप्रैल 2020(3.9 लाख करोड़ रुपया) की तुलना में मई 2020(8.98 लाख करोड़ रुपये) में ई-वे बिल के कुल मूल्यांकन योग्य मूल्य में 130 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई। हालांकि,यह पिछले वर्ष की तुलना में और लॉकडाउन से पहले के स्तरों से कम है। 1 और 19 जून के बीच बनाए गए ई-वे बिल का मूल्य 7.7 लाख करोड़ रुपये है जबकि महीना पूरा होने में 11 दिन बाकी हैं।
देश में खपत और विनिर्माण गतिविधि को दर्शाने वाला प्रमुख संकेतकपेट्रोलियम उत्पादों की खपतअप्रैल में 99,37,000 मीट्रिक टन से बढ़कर मई में 1,46,46,000 मीट्रिक टन हो गई जो 47 प्रतिशत की वृद्धि है।इसके परिणामस्वरूप, पेट्रोलियम उत्पादों की खपत वृद्धि में वर्ष दर वर्ष संकुचन अप्रैल में (-) 45.7 की तुलना में मई में बहुत कम (-)23.2 प्रतिशत रही। जून महीने मेंपेट्रोलियम उत्पादों की खपत में वृद्धि लॉकडाउन हटने के एक महीने बाद और अधिक बने रहने की उम्मीद है।


सुदूर क्षेत्रों में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) ने एक बार फिर से जमीनी स्तर पर अपनी उपयोगिता साबित की है। लॉकडाउन के दौरान कृषि चुनौतियों का समाधान करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों ने विभिन्न सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उपकरणों के पूरी क्षमता का उपयोग करते हुए किसानोंका समर्थन किया।

ई-पुस्तक ‘कोविड-19 के दौरान अभिनव कृषि समाधान’ कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा चयनित सफल हस्तक्षेपों का संकलन है जो कोविड-19 लॉकडाउन की तपिश को मात देने में किसानों के लिए काफी मददगार साबित हुआ।

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