बजट

बजट व बजट के प्रकार

बजट

दरसअल बजट की व्युत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द 'Bougette' (ब्युजे) से हुई है। जिसका अर्थ है 'चमड़े का एक छोटा सा थैला।' इंग्लैंड में बजट शब्द का प्रयोग उस थैले के लिए किया जाता था जिसमें सरकारी व्ययों को पूरा करने के प्रस्ताव होते थे। आज के समय में बजट का मतलब उस दस्तावेज से है जिसमें एक निश्चित समयावधि के लिए देश के आय-व्यय का अनुमानित ब्यौरा होता है। जहाँ मंत्री उसे संसद में स्वीकृति प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत करता है। भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि 1 अप्रैल से 31 मार्च तक तय की गई है।

संविधान मे अलग से अनुछेद बना कर विस्तारित भी किया गया है. आजाद भारत का सबसे पहला केन्द्रीय बजट छब्बीस नवम्बर, उन्नीस सौ सैतालिस (26/11/1947) को आर.के.शंमुखम के द्वारा संसद मे प्रस्तुत किया गया था.

संविधान के अनुसार बजट

संविधान के अनुछेद (Artical) 112 के अनुसार, राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान ,संसद के दोनों सदनों के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण रखवाते है, जिसमे सरकार के गत वर्ष के आय/प्राप्तियों व व्ययों का ब्योरा होता है.

बजट मे अनुमानित मुख्य रूप से दो मदों को लिखा जाता है –

  1. भारत सरकार की संचित निधि पर लगे व्यय.
  2. सरकार की संचित निधि के लिये किये जाने वाले अन्य व्ययों की भरपाई के लिये अपेक्षित राशि.
  3. बजट निर्माण के उद्देश्य (Aim of Budget in hindi)
  4. प्रत्येक वर्ष के लिये सरकार पूर्व मे ही योजना बना लेती है. जिसमे सरकार की आय के स्त्रोत जैसे- भिन्न-भिन्न करो की वसूली या टैक्स, राजस्व से आय, सरकारी फीस-जुर्मना, लाभांश, दिये गये ऋण पर ब्याज आदि सभी आय और इन आय को वापस जनता के लिये लगाना बजट का मुख्य उद्देश्य होता है.

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